जादूगर विचार
जादूगर विचार
देवपुर गाँव से, इस बार के मेले में सुखीराम का लगभग सारा सामान बिक चूका था
सुखीराम ने सोचा जंगल के रास्ते से जल्दी घर जा सकता हु !
ओर कोई जोखिम भी नहीं था सुखीराम के पास घने जंगल में पगडण्डी के साहेरे सुखीराम निकल पड़ा
मेले ने सुखीराम को थका दिया था, संध्या होने में अभी काफी समय था
थकान के कारण, सुखीराम वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गई।
यह मात्र संयोग ही था, सुखीराम इच्छापूर्ति वृक्ष के नीचे बैठ कर आराम कर रहा था
सुखीराम को नहीं पता था इच्छापूर्ति वृक्ष के नीचे बैठ कर कोई भी इच्छा करने से वह तुरंत पूरी हो जाती थी।
जागते ही, सुखीराम को बहुत भूख लगी उसने सोचा काश कुछ खाने को मिल जाए !
ओर तभी स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।
सुखीराम ने खाना खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा. काश कुछ पीने को मिल जाए
तभी उसके सामने हवा में तैरते हुए गुलाब का शरबत आ गए। शरबत पीते पीते सोचने लगा कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ।
सुखीराम ने सोचा, हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना जरूर इस पेड़ पर कोई भूत रहता है
जो मुझे खिला पिला कर बाद में मुझे खा लेगा ऐसा सोचते ही सुखीराम सामने एक भूत आया और उसे खा गया।
इच्छापूर्ति वृक्ष कही हो या न हो विचार आप का जीवन बदल सकते है
विचार जादूगर की तरह होते है सकारात्मक सोच रखें
इतना समझ लें कि सुख दुख, हार जीत व सफलता विफलता जीवन का हिस्सा है, इन्हीं के साथ से जीवन को चलता है।
खुशी खुशी जीवन को बिताइए। 'मन के जीते जीत है' मन को हारने मत दीजिए।
