लोहे की जंजीर
लोहे की जंजीर
आप किस पर विश्वास करते है
यह कहानी एक छोटे से गाँव की है, देवपुर ! वहां के सभी लोग संत हीरानंद का बहुत मान करते थे ! पूरा गांव हीरानंद से प्रभावित था ! उनकी भक्ति और तप की बाते पूरे देवपुर में हुआ करती थी !
हीरानंद की भक्ति करने का तरीका भी सबसे विपरीत ! वो अपने आप को एक लोहे की जंजीर से बांध कर कुएं में उलटा लटक जाते और कहते जिस दिन यह जंजीर टूटेगी मुझे ईश्वर का दर्शन हो जायेगे
एक रोज एक बच्चे के मन में इच्छा जागी ! क्यों ना मैं भी भगवान के दर्शन कर लू ! बच्चे के पास लोहे के ज़ंजीर तो नहीं थी ! पर विश्वास पक्का था !
बच्चे ने अपने पर रस्सी से बांधे और वह भी कुएं में उल्टा लटक गया ! जैसे ही उसने भगवान का ध्यान किया ! भगवान ने उसे अपनी गोद में उठाया, दर्शन भी दिए और कुएं से बाहर छोड़ दिया !
भगवान अंतर्ध्यान होने वाले थे कि बच्चे ने पूछ लिया, महाराज तो इतने सालों से लटक रहे हैं ! आप ने उन्हें दर्शन नहीं दिएभगवान ने कहा लटकते जरूर है, पर उनका पैर लोहे की जंजीर से बंधा हुआ है
हीरानंद को मुझ से ज्यादा जंजीर पर विश्वास है !और तुम्हें जंजीर से ज्यादा मुझ पर विश्वास था !
फर्ख पड़ता है ! आप किस पर कितना विश्वास करते है जिसने सृष्टि को बनाया है उस पर पहले भरोसा करना चाहिए। उसके बिना कुछ भी होना संभव नहीं है
