दोहे का चमत्कार

 दोहे का चमत्कार | नर्तकी की कहावत 


एक दोहे में कहे गए शब्द किसी ग्रन्थ से काम नहीं होते है | एक दोहे में बहुत गहरी बात छुपी होती है | आप उस बात को समझ ली और अपने जीवन में उतार लें तो संभावनाओं के और कल्याण के नए रास्ते खुल सकते हैं | बस हमारी स्वयं की जागने की इच्छा होनी चाहिये 

एक राजा था  जिसे राज भोग भोगते काफी समय हो गया था  बाल भी सफ़ेद होने लगे थे  एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा उत्सव में मुजरा करने वाली और अपने गुरु को बुलाया साथ ही दूर देश के अपने मिञ राजाओं को भी बुलवा लिया  राजा ने कुछ मुद्राएं अपने गुरु को दी कि, जो बात मुजरा करने वाली की अच्छी लगेगी वह मुद्रा उसे मेरा गुरु देगा 

सारी रात मुजरा चलता रहा  सुबह होने वाली थीं, मुज़रा करने वाली ने देखा मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है उसको जगाने के लियें मुज़रा करने वाली ने एक दोहा पढ़ा

बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिहाई 
एक पलक के कारने, ना कलंक लग जाए 

अब इस दोहे का अलग अलग व्यक्तियों ने अलग अलग अपने अपने अनुरूप अर्थ निकाला तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा जब ये बात गुरु ने सुनी, गुरु ने सारी मोहरे उस मुज़रा करने वाली को दे दी वही दोहा उसने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नौलखा हार दे दिया उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के लड़के ने अपना मुकट उतारकर दे दिया 

जब वह  फिर वही दोहा दोहराने लगी, तो राजा ने कहा बस कर, एक दोहे से तुमने नर्तकी होकर सबको लूट लिया है जब ये बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु जी के नेत्रो में जल आ गया और कहने लगा, राजा इसको तूं नर्तकी न कह, ये तो मेरी भी गुरू है

 इसने मुझे सीख दी है कि मैं, सारी उम्र जंगलों मे भक्ति करता रहा और आखरी समय में मुज़रा देखने आ गया हूँ मैं तो वापिस भजन व प्रभु चितंन के लिये जा रहा हूँ राजा की लड़की ने कहा, पिताजी आप मेरी विवाह नहीं कर रहे थे  आज मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था  इसनें मुझे सुमति दी है कि कभी तो तेरी शादी होगी  क्यों अपने पिता को कलंकित करती है

राजा के लड़के ने कहा, आप मुझे राज नहीं दे रहे थे  मैंने आपके सिपाहियों से मिलकर आपका क़त्ल करवा देना था   इसने समझाया है कि आखिर राज तो तुम्हे ही मिलना है  क्यों अपने पिता के खून का पाप अपने सर लेते हो जब ये बातें राजा ने सुनी तो राजा ने सोचा क्यों न मैं, अभी राजतिलक कर दूँ, गुरु भी मौजूद हैं  राजा ने उसी समय राजकुमार का राजतिलक कर दिया और लड़की से कहा बेटा, मैं आपकी शादी जल्दी कर दूँगा 

मुज़रा करने वाली कहती है, मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, मैं तो ना सुधरी हे प्रभु ! आज से मैं भी तेरा नाम सुमिरन करुँगी 

देखा आपने, कैसे एक दोहे ने अपना प्रभाव छोङती है  बस हमारी स्वयं की जागने की इच्छा होनी चाहिये 


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